उमरिया-
एम.पी.स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन लिमिटेड जिला उमरिया जो अपने प्रबंधको की कार्यप्रणाली के कारण पहले ही तलातल में पहुंच चुका है। वर्तमान जिला प्रबंधक रोंहित सिंह के प्रभार सभालने के बाद तलातल से रसातल मे पहुॅचता नजर आ रहा है। रोहित सिंह के लिए शासन के हित महत्व न होकर मिलर्स के हित अधिक महत्वपूर्ण नजर आ रहे है।
यह है घटनाः-
बीते दिनों मानपुर विकासखंण्ड के बसकुटा गाॅव में 09 जुलाई 2026 को डी.के. राईस मिल में आग लग गई थी। इस धटना में एम.पी.स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन की करोंडोे रूपयें की धान जलकर खाक हो गई थी। पूरे धटनाक्रम में राईस मिल संचालक की संदिग्ध भूमिका के साथ-साथ प्रभारी जिला प्रवंधक रोंहित सिंह का खराब प्रवंधन एवं लापरवाही उजागर होती है।
भण्डारण क्षमता से अधिक धान उठाव की दी अनुमतिः-
डी.के राईस मिल बसकुटा के गोदाम की भण्डारण क्षमता बमुष्किल पाॅच हजार क्विंटल भंण्डारण की है। डी.के राईस मिल बसकुटा को दिसम्वर 2025 से फरवरी 2026 तक लगभग 17-18 लाॅट धान उठााव के डिलेवरी आर्डर जिला प्रवंधक कार्यालय द्वारा जारी किये गये। प्रष्न यह उठता है, कि जब डी.के राईस मिल के द्वारा दिसवंर से फरवरी के मध्य मिलिंग कार्य किया ही नही जा रहा था ओर जिला प्रवंधक कार्यालय डी.के राईस मिल की गोदाम क्षमता से भलीभांति भिज्ञ था तो इसके बावजूद 17-18 लाॅट धान अर्थात लगभग 7500 क्ंिवटल धान के उठाव के लिए डी.के. राईस मिल को किस आधार पर डिलेवरी आर्डर जारी किये गये ? क्या डिलेवरी आर्डर पर हस्ताक्षर करते समय रोंहित सिह को इस तथ्य का ज्ञान नही था अथवा सुनियोजित तरीके से गोदाम की क्षमता से लगभग दोगुनी धान उठाव के लिए डिलेवरी आर्डर जारी किये गये।
उठाई गई धान की पोर्टल में नही कराई गई प्रविष्टिः-
जिला प्रवंधक द्वारा जारी डिलेवरी आर्डर के आधार पर उपार्जन केंन्द्र/एम.पी.डब्ल्यू.एल.सी. के वेयरहाउस से धान का उठाव करने के बाद कार्पोरेषन के पोर्टल पर उपार्जन केन्द्र/वेयरहाउस प्रभारी द्वारा डिलेवरी आर्डर पर दी गई पावती के आधार आॅनलाईन प्रविष्टि कार्पोरेषन के कर्मचारियों के द्वारा की जाती है। डी.के राईस मिल ने माह दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक धान का उठाव किया गया। नियमतः धान उठाव से अधिकतम 07 दिवस की अवधि के भीतर पोर्टल पर उठाई गई धान की मात्रा की प्रविष्टि हो जानी चाहिए लेकिन जिला प्रवंधक रोंहित सिंह की वेखुदी का आलम कहां जाए या डी.के राईस मिल प्रोपाईटर दीपक गुप्ता के साथ विभाग की जडों मे मट्ठा डालने के लिए किया गया गठजांेड कि धान उठाव के पश्चात् 06 माह की अवधि बीत जाने के बाद भी रोंहित सिंह धान उठाव की प्रविष्टि 09 जुलाई 2026 तक नही कराया था।
ट्रकों की जीपीएस लोकेषन से होगा घोटाला उजागरः–
विधानसभा सत्र मार्च 2025 के दौरान ध्यानाकर्षण सूचना क्रं0 103 दिनाॅक 11/03/2025 पर चर्चा के दौरान खाद्य मंत्री गोंविद सिह राजपूत द्वारा दिये गये वक्तव्य के बिन्दु क्रं0/02 मे यह निर्देषित किया गया है कि मिलिंग हेतु धान एवं मिलिंग उपरांत चावल परिवहन किये जाने वाले वाहनों में आवष्यक रूप से जीपीएस सिस्टम लगाये जाकर सेंट्रल कमाण्ड सिस्टम से मानीटरिंग की जाएगी। जाहिर है कि डी.के राईस मिल के वाहनों मेे लगे जीपीएस टैªकर डिवाईस की जाॅच की जाये तो भंण्डारण क्षमता से अधिक उठाव की गई धान के साथ किये गये काले पीले कारनामें की सच्चाई सामने आ जाएगी जीपीएस टैªकर की जाॅच से ही इस बात का खुलासा हो सकता है कि डी.के राईस मिल के ट्रक धान उठाव के बाद राईस मिल के गोदाम के अलावा कहां-कहां गये थे।
आग के बहाने दोहरा पैसा कमाने का खेंल ?
जनता के बीच दबी जुबान में चर्चा है, कि दीपक गुप्ता 17-18 लाॅट धान बेंच खाया हैै। दीपक गुप्ता राईस मिल का बीमा भी करवा रखा है। जनचर्चा की शासन प्रषासन की आखों मे धूल झोखने के लिए और बीमा की राषि का लाभ प्राप्त करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से मिल को आग के हवाले किया गया है मिल में आग लगने से शासन को भले ही करोंडो रूपये का चूना लगा हो लेकिन दीपक गुप्ता के दोनो हाथों में बेची गई धान ओर बीमा के पैसे के लड्डू नजर आ रहे है। राईस मिल में अग्निषामक यंत्र की व्यवस्था न होना भी दीपक गुप्ता को संदेह के दायरे मे लाता है।
नही कराई गई एफ.आई.आरः-
पूरे प्रकरण मेे प्रभारी जिला प्रवंधक रोंहित सिंह डी.के. राईस मिल के प्रोपाईटर दीपक गुप्ता का बचाव करते प्रतीत होते है। डी.के. राईस मिल बसकुटा में आग लगने की धटना के फलस्वरूप दीपक गुप्ता के कथनानुसार 17-18 लाॅट करोंडोे रूपये की धान जलकर खाक हो गई लेकिन धटना के 07 दिन बाद भी न तो दीपक गुप्ता ओर न ही रोंहित सिंह ने पुलिस में एफ.आई.आर दर्ज कराई है। सूत्र बतातें है, कि जिला प्रवंधक ओर दीपक गुप्ता को यह डर सता रहा है कि एफ.आई.आर. कराने पर पुलिस फोरेंसिक जाॅच न करवा ले जिससे आग में भूसी जली है या धान, यह बात की सच्चाई उजागर न हो जाए। एम.पी.स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन लिमिटेड उमरिया व मिलर्स के गठजोंड के लिए यह शेर चरितार्थ होता है-
“बर्बाद ए-गुलिस्ताॅ करने को बस एक ही उल्लू काफी था,
हर शाख पर उल्लू बैठा ह ैअंजाम-’ए गुलिस्ताॅ क्या होगा।”
