नगर परिषद चंदिया का मामलाः-
चंदिया/शहडोंल
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग संभाग शहडोंल में शासन के नियम कानूनों को धता बतातें हुए नियुक्तियां,पदोंन्नति,संविलियन व नियमितीकरण करने का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है। प्रकरण उमरिया जिला अंतर्गत नगर परिषद चंदिया के दो कर्मचारियों के सहायक राजस्व निरीक्षक पद पर नियम विरूध्द किये गये नियमितीकरण का है।
यह है मामलाः-
नगर परिषद चंदिया के दस्तावेजों के अनुसार नगर परिषद चंदिया में हरीदीन कोल को दिनॉक 07/06/1995 से तथा अशोक कचेर को दिनॉक 01/04/1996 से दिनॉक 28/09/2017 तक दैंनिक वेतनभोगी/मस्टर श्रमिक के रूप में पंप चालक कार्य पर तैनाती की गई थी। इसके बाद पात्रता अनुसार इन्हें दिनॉक 29/09/2017 से स्थायीकर्मी में विनियमित किया गया लभभग 22 वर्षो तक दोनो कर्मचारियों नें पंप चालक का कार्य किया लेकिन विनियमितीकरण पशचात् दोनो कर्मचारियों का नियमितीकरण सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर कर दिया गया जो कि नियमविरूध्द है।

यह है नियमः-
मध्यप्रदेष शासन सामान्य प्रशसन विभाग मंत्रालय भोपाल के पत्र क्रं0/एफ 5-1/2013/1/3 भोपाल दिनॉक 07 अक्टूवर 2016 में दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों के लिए स्थायीकर्मी में विनियमित करने की योजना के साथ संलग्न परिषिष्ट ”अ” में यह स्पष्ट निर्देश दिये गये है कि विनियमित किये गये स्थायीकर्मियो को केवल चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित किया जाएगा। स्थायीकर्मी को जिले के चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पद पर नियुक्ति हेतु कोई परीक्षा अथवा साक्षात्कार नही देना पडेगा। निर्धारित मापदंण्ड की पूर्ति होने पर मेरिट आधार पर चयन सूची तैयार की जाएगी।
नियमों का उल्लंघनः-
सहायक राजस्व निरीक्षक पद पर नियमितीकरण हेतु चाही गई जानकारी में कार्यालय नगर परिषद चंदिया द्वारा हरीदीन कोल ओर अशोक कचेर को पंप चालक बताया गया है जबकि जिला चयन समिति की बैठक दिनॉक 29/02/2019 के कार्यवाही विवरण में दोनो कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति दिनॉक से दिनॉक 28/09/2017 तक की अवधि में सहायक राजस्व निरीक्षक के कार्य पर तैनाती दशाई गई है दोनो विरोधाभाशी दस्तावेंज संदेह की स्थिति निर्मित करते है। पष्न यह उठता है कि जब स्थायीकर्मी को तृतीय श्रेंणी के पद पर नियमितीकरण किये जाने का प्रावधान ही नही है तो किस आधार पर हरीदीन कोल और अशोक कचेर जो कि पंप चालक के तौर पर भर्ती किये गये थे, को सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर नियमित किया गया है। स्पष्ट है कि पूरी प्रक्रिया में जिला चयन समिति, पी.आई.सी. व तत्कालीन मुख्यनगर पालिका अधिकारी ने शासन के नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुये अपने निहित स्वार्थो की पूर्ति हेतु दोनो कर्मचारियों का चतुर्थ श्रेंणी के पद की जगह तृतीय श्रेंणी के पद पर नियमितीकरण किया है।
सयुक्त संचालक ने किया बड़ा खेलः-
म0प्र0शासन सामान्य प्रशासन विभाग मंत्रालय (वेतन प्रकोंष्ठ) के ज्ञापन क्रं0/एफ 5-14/1/वेआप्रा/99 भोपाल दिनॉक 14 फरवरी 2000 के माध्यम से समस्त प्रमुख सचिव/सचिव,समस्त विभागाध्यक्ष, समस्त आयुक्त, व समस्त कलेक्टर्स को प्रेषित पत्र में दिनॉक 31/12/1988 के बाद दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति को पूर्णतः प्रतिबंधित करने तथा शासन के आदेंशॊ के विपरीत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की भर्ती करने वाले अधिकारीयों से इन कर्मचारियों के वेतनभत्तें,मजदूरी तथा इनके प्रकरणों को न्यायालयों में प्रतिरंक्षण पर आने वाले व्यय की वसूली नियुक्तिकर्ता अधिकारी से करने तथा 10 से अधिक दैनिंक वेतनभोगी कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले अधिकारीयों के विरूध्द ब्रीच ऑफ ट्रस्ट का अपराधिक मुकदमा चलाने का आदेंश जारी किया था उक्त आदेंश से भलीभांति भिज्ञ होने के बाबजूद आर.पी.सोनी तत्तकालीन संयुक्त संचालक नगरीय प्रषासन रीवा एवं शहडोंल संभाग ने वर्ष 1988 के बाद नियुक्त दोनो दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने तथा तत्कालीन सी.एम.ओ से इनके वेतन की राशि वसूली करने के स्थान पर सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर नियमित कर दिया। सूत्र बताते है, कि सहायक राजस्व निरीक्षक के पद पर नियम विरूध्द नियमितीकरण करने तथा तत्कालीन सी.एम.ओ. से वसूली न करने के एवज मे आर.पी.सोनी मोटी रकम वसूला है।
जॉच हो तो सामने आएंगे सेानी के कारनामेंः-
तत्कालीन संयुक्त संचालक मकबूल खान के समय में व्यापक पैमाने पर नियमविरूध्द की गई भर्तियों व संविलियन का मामला उजागर हुआ था जिसके लिए मकबूल खान के विरूध्द बर्खास्तगी की कार्यवाही की गई थी। सूत्र बताते है कि मकबूल खान तो घोटाले की छोटी मछली है, घोटाले का असली मगरमच्छ आर.पी.सोनी है। जिसने हर निकाय में इक्का दुक्का कर्मचारियों को नियमितीकरण/संविलियन में अनुचित लाभ देकर मोटी रकम कमाई है। यदि आर.पी.सोनी के कार्यकाल में जिला चयन समिति की समस्त कार्यवाहियों की उच्च स्तरीय जॉच करायी जाए तो पदोन्नति व नियमितीकरण में किये गये आर.पी.सोनी के कारनामों से पर्दा हट सकता है।
चॉदी काट रहे सहायक राजस्व निरीक्षकः-
पंप चालक से सहायक निरीक्षक बने हरीदीन कोल और अशोक कचेर जमकर चॉदी कॉट रहे है। जनता से टैक्स के पैंसे कम करने के नाम पर की जा रही वसूली से इन कर्मचारियों का उतरोतर विकास हो रहा है। यदि लोकायुक्त या ई.ओ.डब्ल्यू. जैसी एजेंसियों से आर.पी.सोनी ओर दोनो राजस्व निरीक्षकों की वेतन के अनुपात में संपत्ति की जॉच करवाई जाए तो इनके विरूध्द भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण कायम हो सकता है।
