जिला उमरिया =जहां एक ओर शासन-प्रशासन आम जनता को नियमों के पालन के लिए जागरूक करने में जुटा है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं नियमों की धज्जियां उड़ाने का मामला अब सरकारी विभाग से ही सामने आया है।
ताजा मामला जिला उमरिया के जनसंपर्क कार्यालय से जुड़ा हुआ है, जहां विभाग में लगा एक बुलेरो वाहन (क्रमांक MP 18 ZA 3401) खुलेआम यातायात नियमों की अनदेखी करता नजर आ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि यह वाहन उसी जनसंपर्क विभाग में लगा है, जिसका मुख्य कार्य शासन की योजनाओं और नियमों को जनता तक पहुंचाना और उन्हें जागरूक करना है। लेकिन जब विभाग खुद का वाहन ही नियमों को ताक पर रख चलाया जा रहा हो , तो यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।
तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि वाहन के फ्रंट में “जनसंपर्क अधिकारी” का बोर्ड इस तरह लगाया गया है कि नंबर प्लेट पूरी तरह से ढक गई है। नीचे केवल आंशिक नंबर ही दिखाई देता है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार, नंबर प्लेट को किसी भी प्रकार से ढंकना या अस्पष्ट करना सीधा-सीधा कानून का उल्लंघन है।
यह लापरवाही केवल नियमों की अनदेखी तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है। यदि इस वाहन से कोई दुर्घटना या आपराधिक घटना घटित होती है, तो नंबर स्पष्ट न होने के कारण उसकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आम नागरिक इस तरह की गलती करता है, तो उस पर तुरंत चालान और कार्रवाई होती है। लेकिन जब यही काम किसी सरकारी विभाग के वाहन द्वारा किया जाता है, तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? क्या यह दोहरे मापदंड का उदाहरण नहीं है?
जनसंपर्क विभाग, जो शासन और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु की भूमिका निभाता है, उससे ऐसी लापरवाही न केवल विभाग की छवि को धूमिल करती है, बल्कि प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
अब देखना यह है कि सबंधित इस मामले क़ो कितनी गंभीरता से लेता है। या फिर विभागीय रसूख के दम पर “जनसंपर्क अधिकारी” का बोर्ड लगाए यह वाहन यूं ही फर्राटा भरते हुए नियमों का मजाक उड़ाता रहेगा?



