जैतहरी-जैतहरी में मध्य प्रदेश शासन की बहुमूल्य भूमि पर कथित अवैध कब्जा कर दो मंजिला भवन निर्माण किए जाने और उसे किराये पर संचालित किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और शिकायतों के अनुसार, कौशल्या एवं सोहन प्रजापति द्वारा शासकीय भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर भवन निर्माण किया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उक्त भवन के संबंध में नगर परिषद जैतहरी के जिम्मेदार अधिकारियों को लिखित रूप से जानकारी दिए जाने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, भवन निर्माण को लेकर नगर परिषद द्वारा पूर्व में नोटिस जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य और उसके उपयोग को रोकने की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नोटिस जारी हुए तो फिर NOC कैसे?
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि जिस भवन के अवैध निर्माण को लेकर नगर परिषद द्वारा कथित रूप से कई नोटिस जारी किए गए थे, उसी भवन के लिए नए विद्युत कनेक्शन हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी किया गया।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि नगर परिषद जैतहरी के जिम्मेदार अधिकारी भूपेंद्र सिंह द्वारा विद्युत कनेक्शन के लिए NOC जारी किए जाने के बाद उक्त भवन में एक साथ पांच विद्युत कनेक्शन किए गए।
यदि दस्तावेजों से यह प्रमाणित होता है कि भवन वास्तव में शासकीय भूमि पर निर्मित है और उसके निर्माण के संबंध में नगर परिषद द्वारा कार्रवाई/नोटिस लंबित थे, तो यह गंभीर प्रशासनिक प्रश्न बनता है कि ऐसे भवन के लिए विद्युत कनेक्शन हेतु अनापत्ति प्रमाण-पत्र किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर जारी किया गया।
विद्युत विभाग की जांच के बाद भी कार्रवाई लंबित-
शिकायतकर्ता के अनुसार, पांच विद्युत कनेक्शनों के संबंध में लिखित शिकायत किए जाने के बाद विद्युत विभाग के कार्यपालन अभियंता स्तर से जांच की गई और जांच के बाद उक्त विद्युत कनेक्शनों को Permanent Disconnection किए जाने का आदेश भी जारी किया गया।इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि आदेश के बाद भी संबंधित स्तर पर विद्युत कनेक्शन स्थायी रूप से विच्छेद करने की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
संरक्षण के आरोपों की हो निष्पक्ष जांच-
शिकायतकर्ता ने नगर परिषद जैतहरी के अधिकारी भूपेंद्र सिंह पर जानबूझकर कार्रवाई नहीं करने और कथित रूप से संबंधित भवन को संरक्षण देने के आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच आवश्यक है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन को चाहिए कि भूमि के राजस्व अभिलेख, भवन अनुमति, नगर परिषद द्वारा जारी नोटिस, NOC, विद्युत कनेक्शनों के आवेदन एवं स्वीकृति दस्तावेज तथा विद्युत विभाग द्वारा की गई जांच और Permanent Disconnection के आदेश की स्वतंत्र रूप से जांच कराई जाए। यदि जांच में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, नियमविरुद्ध भवन निर्माण, गलत दस्तावेजों के आधार पर NOC अथवा विद्युत कनेक्शन और अधिकारियों द्वारा आदेशों की अवहेलना प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के साथ-साथ लापरवाही या मिलीभगत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी निर्धारित की जानी चाहिए।मामले का मूल सवाल यही है कि जब कथित अवैध भवन के संबंध में शिकायतें और नोटिस पहले से मौजूद थे, तो उसी भवन को वैध विद्युत कनेक्शन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए NOC किस आधार पर जारी की गई? और यदि विद्युत विभाग ने जांच के बाद Permanent Disconnection का आदेश जारी कर दिया था, तो उस आदेश का पालन अब तक क्यों नहीं हुआ ? इन सवालों का जवाब दस्तावेजों के आधार पर संबंधित विभागों से लिया जाना आवश्यक है।
