नागरिक आपूर्ति निगम उमरिया का मामलाः-
उमरियाः-
नागरिक आपूर्ति निगम उमरिया में रोंहित सिंह को जिला प्रवंधक का प्रभार मिलने के बाद से निगम शासन के दिशा निर्देशों के संचालित होने के स्थान पर मिलर्स की मनमानी से संचालित होता नजर आ रहा है। मिलर्स,रोेंहित सिह ओर एम.पी.डब्ल्यू.एल.सी.(म.प्र वेयर हाउसिग लॉजिस्टिक कार्पोरेशन) जिला उमरिया की प्रवंधक श्रीमति लक्ष्मी मरावी के संरक्षण में शासन द्वारा जारी मिलिंग नीति की धज्जियां उड़ातें हुए शासन को करोंडों़ रूपये की चपत लगा रहे है।
यह है नियमः-
एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन के द्वारा मिलर्स को खरीफ उपार्जन के समय एक लॉट अर्थात 433.0 क्विटल धान का उठाव के समय 1083 नग बारदाने उपलव्ध कराये जाते है। उपलव्ध कराये गये बारदानों में 54 प्रतिशत नये बारदाने एवं 46 प्रतिशत एक भर्ती पुराने बारदाने होते है, जिनमें मिलर्स धान का उठाव करते है। मिलिंग अर्थात धान दराई के उपंरात मिलर्स को मिलिंग किया गया चावल कार्पोरेशन द्वारा उपलव्ध कराये गये 54 प्रतिशत नये बारदानों में म,प्र वेयरहाउसिंग लॉजिस्टिक कार्पोरेशन में जमा कराना होता है। कार्पोरेशन द्वारा उपलव्ध कराये गये 46 प्रतिशत एक भर्ती पुराने बारदाने का उपयोग वेयरहाउस में चावल जमा कराने के लिए नही किया जा सकता है। पुराने 46 प्रतिशत बारदाने आगामी खरीफ उपार्जन में धान भर्ती हेतू उपयोग में लाये जाते है। वेयरहाउस में चावल रखने हेतू केवल नये बारदानो का ही उपयोग किया जा सकता है। शासन की गाईडलाईन के अनुसार नये बारदाने का वजन 580 ग्रा्रम एवं पुराने बारदाने का वजन 500ग्राम माना जाता है।
इस तरह हुआ धोटालाः-
नागरिक आपूर्ति निगम उमरिया के जिला प्रवंधक एवं डब्लू.एल.सी उमरिया की प्रवंधक के द्वारा नियम विरूध्द तरीके से राईस मिलरों से नयें बारदाना के स्थान पर एक भर्ती पुराना बारदाना में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 में मिलिंग के उपरांत प्राप्त चावल को गोदामों में जमा कराया गया है। जवकि म.प्र. शासन नियम यह है, कि एक भर्ती बारदानो का उपयोग धान खरीदी में ही किया जा सकता है,चावल जमा करने में नही किया जा सकता है। एक भर्ती पुराने बारदाने की शासन द्वारा निर्धारत कीमत लगभग 28 रूपये प्रति नग तथा नया बारदाने की कीमत लगभग 90 प्रति बारदाना होती है। बाजार में एक भर्ती पुराना बारदाना लगभग 12-15 रूपयें मेे उपलव्ध हो जाता है। इस प्रकार मिलर्स ने पुराने बारदानों में चावल आपूर्ति कर एम.पी.डब्ल्यू.एल.सी. व नागरिक आपूर्ति निगम से मिलीभगत कर प्रति बारदाना लगभग 75 रूपये का अवैधानिक लाभ प्राप्त किया हैं। एक लॉट धान अर्थात 433 क्विटल धान की मिलिंग के उपरांत लगभग 290 क्विटल चावल प्राप्त होता है जिसकी आपूर्ति हेतु 540 नये बारदाने का उपयोग होना चाहिए। 540 नये बारदानो की कीमत शासन द्वारा कीमत लगभग 48600 रूपये तथा पुराने 540 एक भर्ती बारदानों की कीमत लगभग 8100 रूपयें होती है। इस प्रकार मिलर्स ने अधिकाीरयों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत से पुराने बारदानो में चावल आपूर्ति कर शासन को प्रति लॉट 40500 रूपये का तथा पूरी प्रक्रिया में करोंडों़ रूपये का चूना लगाया गया है।
अधिकारीयांे की भी सहभागिताः-
मिलर्स द्वारा पुराने एक भर्ती बारदाना में चावल जमा कराने के बाबजूद नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा जारी स्वीकृति पत्रक में नये बारदाने में आपूर्ति दर्शायी गई है। स्वीकृति पत्रक जारी करने में विभाग के एम.पी.डब्ल्यू.एल.सी का प्रभारी एवं नागरिक आपूर्ति निगम उमरिया का प्रभारी एवं राईस मिलर्स या उनके प्रतिनिधी के हस्ताक्षर होते है। शासन के नियमानुसार नागरिक आपूर्ति निगम के जिला प्रवंधक को मिलर्स द्वारा जमा किए गई चावल की मात्रा का 25 प्रतिशत निरीक्षण करना अनिवार्य होता है। प्रश्न यह उठता है, कि निरीक्षण के दौरान नागरिक आपूर्ति निगम उमरिया के प्रभारी जिला प्रवंधक रोहित सिह को क्या पुराने बारदानों में की गई चावल की आपूर्ति नजर नही आई ? जाहिर है, कि रोहित सिह ने अपने निहित स्वार्थो की पूर्ति हेतु मिलर्स के कारनामों पर आखें मूंद रखी हैं।
धटि़या चावल की हुए आपूर्तिः-
मिलर्स द्वारा शासन के मापदंण्डो को ताक पर रखकर किनकी युक्त (टूटा चावल) चावल एम.पी.डब्ल्यू.एल.सी के गोदामो में जमा कराया गया है। जिस पर प्रभारी जिला प्रवंधक रोहित सिह ने कोई भी आपत्ति नही की है। जबकि भारतीय खाद्य निगम (एफ.सी.आई) ने शासन के मापदंण्डो का पालन करते हुए केवल उच्य गुणवत्ता का चावल जमा कराया जाना स्वीकार किया है। इस तथ्य की पुष्टि नागरिक आपूर्ति निगम में मिलर्स द्वारा जमा कराया गया चावल व एफ.सी.आई को आपूर्ति किए गए चावल के गुणवत्ता परीक्षण से की जा सकती है। भारतीय खाद्य निगम(एफ.सी.आई) की इस बात की भी प्रंशसा करनी होगी कि जहां एक ओर नागरिक आपूर्ति निगम ने पुराने एक भर्ती बारदानो में चावल की आपूर्ति स्वीकार कर शासन को करोंडो रूपयें का चूना लगाने में अपनी सहभागिता दी है। वही एफ.सी.आई ने शासन के मापदंण्डो का पालन करते हुए केवल नये बारदानों मेे ही चावल जमा कराना स्वीकार किया है।
प्रभारी जिला प्रवंधक नागरिक आपूर्ति निगम उमरिया रोंहित सि के कार्यभार सभालने के बाद से निगम में मिलर्स स्चेच्छाचारिता का बोलबाला हो गया है। ऐसा प्रतीत होता है, कि निगम को रोंहित सिह की जगह मिलर्स संचालित कर रहे है ओर रोंहित सिह ने निगम को मिलर्स हवाले कर दिया यदि आपूर्ति किए गए चावल की गुणवत्ता व बारदानो की उच्यस्तरीय निष्पक्ष जॉच कराई जाए तो रोंहित सिह के वरदहस्त तले मिलर्स द्वारा शासन को लगाई गई करोंडो रूपये की चपत के साक्ष्य निश्चय ही उजागर होगे।

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