11 अक्टूबर को घट स्थापना के साथ माँ शैलपुत्री की आराधना, इस बार पूर्ण नवरात्रि का संयोग

ज्योतिष मठ संस्थान के ज्योतिषाचार्य पं. विनोद गौतम ने बताया कि इस वर्ष यह पूर्ण नवरात्रि है – पूरे 9 दिन अलग-अलग माताओं का आगमन और पूजन होगा। इस वर्ष माता रानी का आगमन हाथी पर हो रहा है, जो अति शुभ और समृद्धि कारक माना गया है।

मुहूर्त:
घटस्थापना के लिए अभिजीत काल दोपहर 11:44 से 12:31 बजे तक सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रदोष काल में अखंड ज्योति की स्थापना की जाएगी। तांत्रिक साधना करने वाले साधक रात्रि 12 बजे महा निशा काल में पूजा करेंगे। प्रातः काल चित्रा नक्षत्र और बैधृति योग के कारण सुबह 6:19 से 10:12 तक का सामान्य मुहूर्त थोड़ा बाधित है, इसलिए अभिजीत काल उत्तम रहेगा।
पं. गौतम के अनुसार ग्रह-नक्षत्र की दृष्टि से इस बार की नवरात्रि विशेष फलदायी है। माता की कृपा प्राप्ति के लिए मंत्र जाप, हवन, यज्ञ, अनुष्ठान और दुर्गा सप्तशती के पाठ किए जाएंगे।
पूजा विधि:
नौ दिनों तक अखंड व्रत का विशेष महत्व है। व्रत में सात्विक रहना, सात्विक बोलना और सात्विक भोजन करना आवश्यक है। बाल, वृद्ध और रोगी के लिए उपासना में शास्त्रीय छूट दी गई है। माता की पूजा पूर्वाभिमुख होकर करनी चाहिए।
पूजा के लिए 9 पुष्प श्रेष्ठ माने गए हैं – गुड़हल, चंपा, चमेली, रातरानी, कमल, हरसिंगार, मोगरा, सदाबहार और गुलाब।
विशेष : व्रत नवमी के दिन नहीं तोड़ना चाहिए। पूर्ण नवरात्रि का व्रत 10वें दिन प्रातः दशमी को खोलने से ही पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। नवमी पर व्रत तोड़ने से अखंड व्रत खंडित माना जाता है।
नवरात्रि की आराधना सृष्टि की संचार व्यवस्था को गति प्रदान करती है और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति लाती है।

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