एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन लिमिटेड जिला उमरिया का मामला
भष्टाचार व स्वेच्छााचारिता के नये-नये कीर्तिमान गढने के लिए प्रदेश में विख्यात हो चुके एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन मे लाखों का बारदाना धोटाला प्रकाश में आया है। मामला बंद हो चुकी राईस मिल को बारदाना के ऐवज में नियम विरूध्द लाखों रूपये के किए गये भुगतान का है।
यह है मामलाः-
सदगुरू राईस मिल मानपुर जिला उमरिया के प्रो0 सुनील गुप्ता ने सत्र 2022-23 में मिलिंग का कार्य संपन्न करने के बाद राईस मिल श्रीराम गुप्ता को बेच दी थी सदगुरू राईस मिल के कें्रता श्रीराम गुप्ता ने नये नाम श्रीराम इंण्डटीज के नाम से फर्म का नया रजिस्टेषन कराया इस प्रकार वर्ष 2023-24 में सदगुरू राईस मिल वैधानिक रूप से अस्तित्व में नही थी तथा वर्ष 2023-24 उक्त फर्म का कार्पोरेषन के साथ कोई भी व्यवसायिक अनुवंध नही था इसके वावजूद बंद हो चुकी फर्म सदगुरू राईस मिल के द्वारा धान खरीदी समितियों को वर्ष 2023-24 में विगत वर्ष के शेष बारदाना की आपूर्ति दर्षाकर फर्म को लगभग 58 लाख रूपये का भुगतान कर दिया गया।

1यह है बारदाना संवंधी प्रक्रियाः-
शासन के निर्देषानुसार आदिम जाति सेवा सहकारी समितियॉ एवं स्व-सहायता समूहों के द्वारा कृषको से धान खरीदी का कार्य किया जाता है। एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन के द्वारा परिवहन कराकर धान को वेयरहाउसिग लॉजिस्टिक कार्पोरेषन के वेयरहाउस में रखवाया जाता है। राईस मिलर्स धान मिलिंग हेतु एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन के जिला कार्यलय से अनुबंध निष्पादित करते है तत्ष्चात कार्पोरेषन मिलर्स को मिलिंग हेतु धान वेयरहाउस या उपार्जन केन्दों से धान उठाने के लिए डिलेवरी आर्डर जारी करता है। एक लॉट अर्थात 433 क्विटल धान के उठाव के लिए 1083 बारदाने की राषि प्रति नया बारदाना लगभग 89 रूपये की दर से तथा पुराना एक भर्ती बारदाना की राषि 27,32 पैसे की दर से कार्पोरेषन द्वारा मिलर्स को उपलव्ध करायी जाती है। प्रति लॉट अर्थात 433 क्विटल धान की मिलिंग उपरांत मिलर्स कुल धान का 67,67 प्रतिषत चावल कार्पोरेषन के पक्ष में वेयरहाउस में जमा करते है। जिसके लिए कुल 540 बारदाने उपयोग मे आते है। शेष बचे 543 नग बारदानों का उपयोग मिलर्स अगले सत्र के धान उपार्जन हेतु कार्पोरेषन के माध्यम से समितियों को एक भर्ती बारदाना प्रदान करने के लिए किया जाता है। पिछले सत्र के शेष बचे बारदानें जिनकी आपूर्ति निगम ने वर्तमान सत्र में समितियों को की है। उसका भुगतान मिलर्स को 27,32 पैसे प्रति बारदाना की दर से कार्पोरेषन के द्वारा किया जाता है।
इस तरह हुआ धोंटालाः-
सदगुरू राईस मिल मानपुर नें वर्ष 2022-23 में 150 लॉट अर्थात 64950 क्विटल धान मिलिंग का कार्य किया नियमानुसार कार्पोरेषन के द्वारा सदगुरू राईस मिल मानपुर को 1,62,375 नग बारदानें या इतने बारदानों के संगत राषि उपलव्ध करायी गए मिलिंग उपरांत 43951,67 क्विटल चावल कार्पोरेषन को उपलव्ध कराया गया जिसके लिए 87903 नग बारदाने प्रयुक्त हुए इस प्रकार 74472 नग बारदानें सदगुरू राईस मिल के पास शेष बचे वर्ष 2023-24 में सदगरू राईस मिल वैधानिक रूप से अस्तित्व में नही थी लेकिन तथाकथित बंद हो चुकी फर्म के मालिक सुनील गुप्ता ने वर्ष 2023-24 में समितियों को 2,11,000 नग एक भर्ती बारदानें की आपूर्ति दिखाकर समिति संचालको की मिलीभगत से उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर बारदानों के भुगतान हेतु 27,32 प्रति बारदाना की दर से 2,11000 नग बारदाने की राषि 57,64,520 रूपये का बिल कार्यालय जिला प्रवंधक मध्यप्रदेष स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन उमरिया में प्रस्तुत किया। नियम कानूनों व इस तथ्य की परवाह किये बिना 1,36,528 अतिरिक्त शेष बारदाने सदगुरू राईस मिल के पास कहां से आई, अपने निहित स्वार्थो की पूर्ति हेतु तत्कालीन जिला प्रवंधक एस,पी,गुप्ता,लेखापाल कमल डोनालें व सहायक मुन्ना लाल चौधरी नें बंद हो चुकी फर्म को लगभग 58 लाख रूपयंे की राषि का भुगतान कर दिया गया।
अपरमुख्य सचिव तक पहुॅची षिकायतः-
मामले की षिकायत अपर मुख्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण विभाग, व प्रमुख सचिव, खाद्य विभाग तक पहुॅचने पर मध्यप्रदेष शासन खाद्य नागरिक आपूर्ति उपभोक्ता संरक्षण विभाग मंत्रालय भोपाल के पत्र क्रं0/68/2026/29 (एफ,सी,एस) भोपाल दिनॉक 10,02,2026 के द्वारा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग के उप-सचिव बी,के,चंदेल ने प्रवंध संचालक एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन को प्रकरण की जॉच करने हेतु निर्देषित किया जिसके अनुक्रम में महाप्रवंधक उपार्जन एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन भोपाल ने क्षेंत्रीय प्रवंधक एम,पी,स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेषन शहडोल पवन अमरोती को 05 दिवस के भीतर प्रकरण की जॉच कर बारदाना कक्ष मुख्यालय भोपाल को जॉच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने हेतु आदेंषित किया। लेकिन तीन संभागों का प्रभार संभाल रहे पवन अमरोती ने महाप्रवंधक उपार्जन के आदेंष को जूते की नोक पर रखते हुए आधा महीना बीतने के बाद भी प्रकरण की जॉच करने की जहमत नही उठाई जो कि कार्पोरेषन में व्याप्त अधिकारियों की स्वेच्छाचारिता का जीता जागता उदाहरण है। देखना यह है, कि कार्पोरेषन के अधिकारियों ओर सुनील गुप्ता की मिलीभगत से शासन को लगाई गई 58 लाख रूपये की चपत की जॉच पवन अमरोती अंजाम तक पहुॅचा पातें है या यह जॉच नोटों के पेपरवेट तले दबी रह जाती है।
